भगवान श्री कृष्ण ने गीता में कहा है कि किसी भी कार्य को करने से पहले उसकी तैयारी में जितना समय व्यतीत किया जाएगा जितना अधिक से अधिक समय उसके अभ्यास में व्यतीत किया जाएगा उतनी ही उसकी सफलता की प्रतिशत बढ़ती जाएगी.
यह ठीक उस तरह से है जैसे कि एक दीपक की लौ और तलवार की धार में. तलवार को धारदार बनने के लिए नुकीला बनने के लिए या फिर तेज बनने के लिए बहुत ही कड़ी अग्नि परीक्षा से गुजरना पड़ता है उसको तपना पड़ता है. उसको लोहार की चोटो को सहन करना पड़ता है. तब कहीं जाकर वह एक योग्य और खतरनाक तलवार बन पाती है ठीक इसी तरह से जीवन की आने वाली हर कठिनाई को हमें सकारात्मक ढंग से लेना चाहिए उसमें धैर्य रखते हुए अपने आप को तपाना चाहिए. क्योंकि आने वाले जीवन के लिए ऐसी कठिन परिस्थितियां एवं अग्नि परीक्षाएं इंसान को सफलता की ओर ले कर जाती हैं.
अतः जितना अधिक समय अभ्यास में व्यतीत किया जाएगा उतना ही कम समय सफलता को हासिल करने में खर्च होगा. यह ठीक उस तरह से है जैसे कि यह कहना जितना अधिक समय युद्ध से पहले युद्ध कला के कौशल में निपुण होने के अभ्यास के लिए व्यतीत किया जाएगा उतना ही कम रक्त युद्ध के मैदान में बहेगा.
अतः जीवन को सकारात्मक दृष्टि से जीने की कोशिश करनी चाहिए और जीवन में आने वाली हर चुनौती को स्वीकार करना चाहिए.
अजय शर्मा "एकलव्य"
#ajaysharma